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ब्रह्मांड पुराण क्या है? जानें इसकी संरचना, महत्व और परशुराम गाथा।

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ब्रह्मांड पुराण 18 महापुराणों में से अंतिम और अत्यंत महत्वपूर्ण पुराण माना जाता है। यह न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से, बल्कि वैज्ञानिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी एक अनमोल ग्रंथ है। आपके ब्लॉग के लिए यहाँ इसका विस्तृत विवरण दिया गया है: ब्रह्मांड पुराण: एक विस्तृत परिचय ब्रह्मांड पुराण का शाब्दिक अर्थ है "ब्रह्मांड का वृत्तांत"। कहा जाता है कि भगवान ब्रह्मा ने इसे सबसे पहले सुनाया था। इसमें लगभग 12,000 श्लोक हैं (अलग-अलग प्रतियों में संख्या भिन्न हो सकती है)। यह पुराण मुख्य रूप से चार भागों (पादों) में विभाजित है: प्रक्रिया पाद: सृष्टि की उत्पत्ति। अनुषंग पाद: युगों का वर्णन और ऋषियों की वंशावली। उपोहद्घात पाद: परशुराम अवतार और विभिन्न राजवंशों का इतिहास। उपसंहार पाद: भविष्य के कल्प और प्रलय का विवरण। प्रमुख विषय और संरचना 1. ब्रह्मांड की संरचना (Cosmology) इस पुराण में ब्रह्मांड की उत्पत्ति को 'हिरण्यगर्भ' (सुनहरा अंडा) के सिद्धांत से समझाया गया है। इसमें खगोल विज्ञान और भूगोल का अद्भुत मिश्रण है: सृष्टि विज्ञान: कैसे अव्यक्त ब्रह्म से महतत्व और फिर अहंकार की उत्पत्ति हुई...